Dr

Add To collaction

गीत -- घनी चाँदनी - काली राते

गीत --
घनी चाँदनी - काली राते ,
दुख बढ जाये ना हो बातें ।
चन्दन  की शीतलता जाती
सुमन से ना रह पाते नाते ।।

सारे कलरव चुप से लगते ,
तितली- मोर कहाँ सुख भरते ।
रोज -रोज कोयल डसती है
सभी झरोखे बन्द ही रहते ।।
मन की हसी कही खो जाती 
गीत -गजल ना अच्छे  लगते ।
घनी चाँदनी काली राते 
दुख बढ जाये ना हो बातें ।।

हम-तुम बिल्कुल एक इकाई 
मिलो तो जैसे बने दहाई ।
कोई दसमलव ना आने दो
मान घटाकर भर दे खाई ।।
हम दोनो पूरक हो जाये
बडते होते जब-जब मिलते ।।
घनी चाँदनी काली राते 
दुख बढ जाये ना हो बाते ।।
     डॉ दीनानाथ मिश्र

   19
2 Comments

Gunjan Kamal

14-Jul-2023 11:49 AM

बहुत खूब

Reply

बेहतरीन सृजन

Reply